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सेब एक, फ़ायदे अनेक

सेब एक, फ़ायदे अनेक
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चाहे सुबह की सुस्ती भगानी हो या अनिद्रा, सेब हर तरह से सेहत के लिए फ़ायदेमंद माना जाता है. यही वजह है कि डॉक्टर्स भी सेब का सेवन करने की सलाह देते हैं. आइए, इस स्वादिष्ट और पौष्टिक फल के बारे में कुछ अनकही बातें जानते हैं. 

17 वीं शताब्दी के अमेरिकी क़ानून के तहत, किसी भी व्यक्ति को अपनी नई ज़मीन पर कुछ भी उगाने से पहले सेब के पांच पौधे लगाने पड़ते थे. इसके बाद ही वह उस भूमि पर कोई दूसरा काम कर सकता था. जॉन कार्लटोन नामक अमेरिकी महापुरुष, जो जॉन एप्पलसीड के नाम से लोकप्रिय थे, सेब को दुनिया की बेहतरीन चीज़ मानते थे. हम भी कुछ हद तक उनके विचारों से सहमत हैं और आपको भी इससे सहमत होना चाहिए. तो आइए, सेब की लोकप्रियता के कारणों पर एक नज़र डालते हैं

पौराणिक काल से ही सेब लोकप्रिय है
पृथ्वी के पहले पुरुष और महिला द्वारा वर्जित फल का सेवन करने के काफ़ी सालों बाद यहूदियों ने शेकार और ग्रीक के निवासियों ने सिकेरा नामक पेय पदार्थ का सेवन किया. यह पेय पदार्थ सेब और खमीर उठे हुए जूस को एकसाथ पकाकर बनाया जाता था. इसे सेहत के लिए अच्छा माना जाता था. रहस्यमय आइल ऑफ़ एवलॉन, जो सेल्टिक के बहादुरों के आराम करने की जगह थी, का शाब्दिक अर्थ सेब का द्वीप है. वसंतऋतु और उत्साह की स्कैंडनेविया (उत्तरी योरोप के कुछ देशों का समूह) की देवी, इडूना उत्तरी योरोप के देवताओं और देवियों को हर शाम अपने बगीचे के सेब खिलाया करती थीं, ताकि जवां बने रहें. सेब के बारे में एक कहावत भी प्रसिद्ध है-रोज़ाना एक सेब खाइए और डॉक्टर से दूर रहिए. सड़े हुए सेब का इस्तेमाल आंखों की सूजन कम करने के लिए किया जाता है. फ्रांस में टाइफ़ॉइड से बचाव के लिए सेब के जूस को पानी में मिलाकर पिया जाता है.

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डॉक्टर्स भी सहमत हैं
यह फल गुलाब की जाति का है. सेब सेहत के बहुत अच्छा माना जाता है. सेब फ़्लेवेनॉइड्स और पॉलिफ़ेनॉल्स का प्रमुख स्नोत है. ये दोनों बेहद प्रभावशाली ऐंटी-ऑक्सिडेंट्स हैं. अध्ययनों से पता चलता है कि 100 ग्राम सेब खाने से आपको उतनी ही मात्रा में ऐंटी-ऑक्सिडेंट मिलते हैं जितने कि 1,500 मिलीग्राम विटामिन सी खाने से मिलता है. सेब में मौजूद विटामिन्स और मिनरल्स रक्त कोशिकाओं को ताक़तवर बनाते हैं. सेब में मौजूद पेक्टिन डायबिटिक लोगों के कोलेस्ट्रॉल और शुगर लेवल को कम करने में सहायता करता है.
सेब में मैलिक और टाटरिक एसिड भी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो पाचन क्रिया सुचारू रूप से चलाने में सहायता करते हैं. इसके अलावा, सेब में मौजूद प्राकृतिक चीनी को पचाना आसान होता है. रात में सोने से पहले एक पके हुए सेब के सेवन करने से अनिद्रा और कब्ज़ से छुटकारा पाया जा सकता है. सेब में विटामिन बी, सी एवं पोटैशियम भी प्रचुर मात्रा होता है, जो हैंगओवर से बाहर निकलने में सहायता करता है. लेकिन ज़रूरत से ज़्यादा सेब का सेवन नहीं करना चाहिए, क्योंकि इसमें हल्की मात्रा में लैक्सटिव भी होता है. जिससे पेट साफ़ होता है. अत: दिन भर में 2 से अधिक सेब का सेवन नहीं करना चाहिए. सेब का भरपूर फ़ायदा उठाने के लिए उसे छिलके सहित बिना काटे ही खाएं. सबसे अच्छी बात यह है कि सेब वसा, सोडियम और कोलेस्ट्रॉल मुक्त होता है.
सेब दांतों के लिए अच्छा होता है. सेब में मौजूद टाटरिक एसिड प्लाक से छुटकारा दिलाने में मदद करता है और मसूड़ों को साफ़ रखने में भी सहायता करता है. अत: इसे प्राकृतिक टूथब्रश के नाम से भी जाना जाता है.

सेब को जानें
* सेब उगाने के विज्ञान को पोमोलॉजी कहा जाता है.
* ताज़ा सेब पानी में तैरता है, क्योंकि उसके वॉल्यूम का 25 प्रतिशत हवा होता है.
* सेब के पेड़ की उत्पत्ति कैप्सियन और काला सागर के बीच के क्षेत्र में हुई थी. विश्वभर में, क़रीब, 7,500 प्रकार के सेब उगाए जाते हैं.
* हमेशा चमकीले और चिकने सतहवाले ताज़े सेब ही ख़रीदें और इन्हें फ्रिज में स्टोर करें.
* कटे हुए सेब को भूरा होने से बचाने के लिए नींबू या नारंगी का रस लगाएं.
* पकानेवाले सेब सामान्य सेब से अलग होते हैं. इनमें चीनी की मात्रा कम होती है. 

सेब के पौष्टिक गुण 
(*पौष्टिक गुण प्रति 100 ग्राम)
विटामिन ए- 3 मिलीग्राम
विटामिन बी- (थिमाइन) 0.07 मिलीग्राम
विटामिन सी- 5 मिलीग्राम
कैल्शियम- 6 मिलीग्राम
आयरन- 3 मिलीग्राम
पोटैशियम- 130 मिलीग्राम
कार्बोहाइड्रेट- 14.9 ग्राम
कैलोरीज़- 58

दादी मां के अपडेटेड नुस्ख़े: 6 एक सेब रोज़ाना, डॉक्टर से बचाए रखेगा!

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क्या है यह सिरीज़?
सदियों से हम दादी-नानी के जिन नुस्ख़ों और कहावतों पर अमल करते आ रहे हैं, क्या आपको नहीं लगता कि समय के साथ, उनमें कुछ बदलाव लाज़मी है? वातावरण में बढ़ते प्रदूषण और हमारी बदली हुई लाइफ़स्टाइल के चलते बाल, त्वचा और सेहत से जुड़े इन तमाम नुस्ख़ों में परिवर्तन अब ज़रूरत बन गया है. हमने एक्सपर्ट्स से बात करके जाना इन नुस्ख़ों में किन ट्विस्ट्स के साथ हम इन्हें अपना सकते हैं. हमने इस सिरीज़ का नाम दिया है दादी मां के अपडेटेड नुस्ख़े

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दादी मां का नुस्ख़ा: एक सेब रोज़ाना, डॉक्टर से बचाए रखेगा

एक्सपर्ट की सलाह: पहले सेब कश्मीर से आया करते थे, पर आजकल विदेशों से भी आते हैं और बारहों महीने फलवाले की दुकान पर उपलब्ध रहते हैं. जो फल थोड़े ही समय में ख़राब हो जाते हैं, वो विदेशों से कई-कई दिनों में यहां पहुंचने पर भी ताज़े कैसे बने रहते हैं? ज़ाहिर है, इसे ताज़ा बनाए रखने के लिए प्रिज़र्वेटिव्स या केमिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है. अत: इन्हें नहीं खाना चाहिए. बजाय इसके कोई भी मौसमी फल, जो स्थानीय है, उसे खाना बेहतर है. क्योंकि यह आपको अच्छी मात्रा में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स देता है. मेरी राय में जो फल सस्ते दामों पर आसानी से उपलब्ध हैं, उन्हें खाया जाना चाहिए. क्योंकि वे स्थानीय उपज होते हैं, मौसम के अनुरूप उगाए जाते हैं और सेहत के लिए फ़ायदेमंद होते हैं. लोगों को चाहिए कि वे स्थानीय खानपान की आदतों को अपनाएं. पहले लोग स्थानीय अनाज खाते थे, जैसे-महाराष्ट्र में रागी, बिहार में सत्तू और उत्तरी क्षेत्रों में जौ, पर अब हम वेस्टर्न डायट की ओर बढ़ रहे हैं. जिसमें हमें कैलोरीज़ चीज़, मक्खन, मैदा और शक्कर से मिलती है. पारंपरिक चीज़ों से मिलनेवाले पोषण की तुलना में ये हमें कहीं ज़्यादा कैलोरीज़ दे रही हैं, पर पोषण नहीं दे रहीं. वह हमें स्थानीय अनाज व फल खाने से ही मिलता है.

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