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विटामिन डी के स्रोत, लाभ और कमी के लक्षण

विटामिन डी के स्रोत, लाभ और कमी के लक्षण



कई बार किसी बड़ी बीमारी की वजह शरीर में किसी एक पोषक तत्व की कमी बन जाती है। हमारी जीवनशैली में बदलाव हो रहे हैं। ऐसे बदलाव जिसमें हम शीशे या एसी युक्त बंद कमरों में बैठ अपने ऑफिस में दिन की एक बड़ी अवधि खर्च कर देते हैं। इस दौरान हम सूरज की रौशनी से दूर हो जाते हैं। सूरज की रौशनी हमारे शरीर के लिये जरूरी विटामिन-डी की एक मुख्य स्रोत है।

हड्डियों की मजबूती के लिये आवश्यक विटामिन-डी वसा में घुलनशील प्रो-हार्मोन्स का एक समूह होता है। यह एक स्टेरॉयड विटामिन है जो आंतों से कैल्शियम को सोखकर हड्डियों में पहुँचाता है। शरीर में इसका निर्माण हाइड्रॉक्सी कोलेस्ट्रॉल और अल्ट्रावॉयलेट किरणों की मदद से होता है।


विटामिन डी की कमी के लक्षण

कमजोरी, कूल्हों, पसलियों या पैरों में दर्द शरीर में विटामिन-डी की कमी के लक्षणों में शुमार हैं। यह लक्षण व्यस्कों में होते हैं। शिशुओं में समय पर दाँत न आना, पैरों की हड्डियों का कमजोर होना, त्वचा का रंग गहरा होना वैसे लक्षण हैं जिससे बच्चों में विटामिन-डी की कमी का पता चलता है। थकान महसूस होना। बच्चों की हड्डियों का टेढ़ा हो जाना, हड्डियों और मांसपेशियों में दर्द रहना, कमर में अक्सर दर्द की शिकायत इसके लक्षणों में शामिल हैं।

विटामिन डी के स्रोत

सूरज की रौशनी के साथ ही मछली विटामिन डी के सबसे अच्छा स्रोतों में से एक है। मछली में उच्च मात्रा में फैटी एसिड होते हैं। मशरूम में विटामिन डी प्रचुर मात्रा में पायी जाती है। दूध या इससे बनी चीजों को खाने में इस्तेमाल करना चाहिए। दूध में कैल्सियम और विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में होता है। दूध से बनी दही शरीर को पौष्टिकता ही प्रदान नहीं करती अपितु यह कैल्सियम को सोखने में भी मदद करती है। फोर्टीफाइड उत्पाद, सोया उत्पाद और कॉडलीवर तेल का सेवन विटामिन डी सम्बन्धी जरूरतों को पूरा करता है।

क्यों जरूरी है मविटामिन डी 

महिलाओं में पीरियड्स और गर्भावस्था के दौरान विटामिन डी बहुत ही जरूरी होता है।

विटामिन डी शरीर में कैल्शियम के स्तर को कंट्रोल करता है, जो हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है।

यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है, साथ ही उच्च रक्तचाप के खतरे को भी कम करता है।


विटामिन डी के फायदे
1. विटामिन डी हमारे हड्डियों को और मजबूत बनाने का काम करता है। इसलिए विटामिन डी से हमारी हड्डिया सालो-साल कमजोर नहीं होती।
2. यदि आप चाहते हैं कि आपकी मांसपेशियां हमेशा काम करे तो विटामिन डी को अपने जीवन में शामिल करें।
3. बहुत कम लोगों को मालूम है कि विटामिन डी हड्डियों को मजबूत करने के अलावा ह्र्दय रोग और उच्च रक्तचाप से भी छुटकारा दिलाने में मदद करता है।
4. टाइप 2 डायबिटीज एक ऐसी गंभीर बीमारी है जिससे तंत्रिका क्षति, हृदय रोग, आंख की क्षति और दृष्टि हानि और गुर्दे खराब हो सकता है। इसलिए हाल ही में एक शोध से पता चला है कि विटामिन डी के सेवन से टाइप 2 डायबिटीज के संकट को कम किया जा सकता है।



विटामिन डी क्या है, इसकी जरुरत और कमी से होने वाले रोग



विटामिन आपके शरीर की ग्रोथ में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। ये मेटाबॉलिज्म, इम्यूनिटी और पाचन जैसे शारीरिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विटामिन डी भी उन्हीं में से एक है। आइए जानते हैं विटामिन डी के बारे में..
विटामिन डी क्या है ?


विटामिन डी, जिसे हम “सनशाइन विटामिन” के नाम से भी जानते हैं। यह शरीर के लिए एक महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। इसका सक्रिय रूप, जिसे कैल्सिट्रियोल कहा जाता है, शरीर में एक हार्मोन की तरह व्यवहार करता है। गर्मियों में सूर्य प्रकाश के 10 से 15 मिनट के एक्सपोजर से शरीर 10,000 आईयू या उससे अधिक विटामिन डी का उत्पादन कर सकता है। विटामिन डी हड्डियों को स्वस्थ्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

सूरज की रोशनी के अलावा कुछ प्राकृतिक खाद्य स्रोत हैं जिनमें विटामिन डी शामिल हैं, जिसमें दूध और दूध से बने खाद्य पदार्थ विटामिन डी की कमी को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गाजर, सॉल्म न और टुना फिश से भी हमें विटामिन डी मिलता है। साक्ष्य बताते हैं कि विटामिन डी के उच्च स्तर वाले लोग लंबी उम्र तक जीवन जी सकते हैं।
विटामिन डी की आवश्यकता क्यों है ?


विटामिन डी से हमारे शरीर और हड्डियों को बहुत ही फायदा मिलता है, लेकिन क्या आपको पता है कि हमारे शरीर को विटामिन डी की आवश्यकता पड़ती है।

पूरे शरीर में विटामिन डी रिसेप्टर्स की मौजूदगी विटामिन के महत्व पर संकेत करती है। अनुसंधान से पता चलता है कि विटामिन डी प्रतिरक्षा प्रणाली, मस्तिष्क, हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई डॉक्टर अब अपने रोगियों के विटामिन डी के लेवल की निगरानी करते हैं और जब यही लेवल कम होता है विटामिन डी सप्लिमेंट की सलाह देते हैं। विटामिन डी की कमी, कई बीमारियों और परिस्थितियों को विकसित करने के जोखिम बढ़ा सकती है।
विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग

ऑटोइम्यून रोग जैसे टाइप 1 डायबिटीज़, मल्टीपल स्केलेरोसिस, और रुमेटीइड अर्थराइटिस विटामिन डी की कमी से जुड़े हुए हो सकते हैं। ऑटोइम्यून रोग तब होता है जब प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के अपने ऊतकों पर हमला करता है। इसके अलावा विटामिन डी की कमी टाइप 2 डायबिटीज़, ऑस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग, मनोदशा विकार, और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम से भी जुड़ा हुआ है।
कैसे पूरी की जाए विटामिन डी की कमी को ?

विटामिन डी की कमी से होने वाले रोग

ऑटोइम्यून रोग जैसे टाइप 1 डायबिटीज़, मल्टीपल स्केलेरोसिस, और रुमेटीइड अर्थराइटिस विटामिन डी की कमी से जुड़े हुए हो सकते हैं। ऑटोइम्यून रोग तब होता है जब प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के अपने ऊतकों पर हमला करता है। इसके अलावा विटामिन डी की कमी टाइप 2 डायबिटीज़, ऑस्टियोपोरोसिस, हृदय रोग, मनोदशा विकार, और यहां तक कि कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिम से भी जुड़ा हुआ है।
कैसे पूरी की जाए विटामिन डी की कमी को ?

विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए आपको सूरज की रोशनी प्राप्त होनी चाहिए। लेकिन इसमें दोपहर की धूप नहीं, सुबह की धूप फायदेमंद होती है। इससे चर्म रोग होने का खतरा भी कम हो जाता है।
बॉडी मास और सनस्क्रीन का उपयोग भी विटामिन डी की कमी में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।
विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए आप डाइट भी ले सकते हैं। इसमें आप दूध और उससे बने प्रोडक्ट को शामिल कर सकते हैं। इसके अलावा सॉल्मन और टुना मछली तथा अंडा को अपने आहार में शामिल करें।
शरीर में विटामिन डी की कमी न हो इसलिए आप सब्जियों का भी सेवन कर सकते हैं। इसके लिए आप गाजर, मशरूम खा सकते हैं। आप जैतून का तेल विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए इस्तेमाल कीजिए।
विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए आपको सूरज की रोशनी प्राप्त होनी चाहिए। लेकिन इसमें दोपहर की
विटामिन डी की कमी का इलाज कैसे करे |
 VITAMIN D KI KAMI KA ILAJ IN HINDI


विटामिन डी की कमी का इलाज कैसे करे | VITAMIN D KI KAMI KA ILAJ IN HINDI


विटामिन डी क्या है? | ABOUT VITAMIN D IN HINDI

विटामिन डी के बारे में जानने से पहले जानेंगे की आखिर विटामिन किसे कहते है और यह विटामिन लेना क्यों आवश्यक है. विटामिन भोजन के वे अवयव हैं जिनकी सभी जीवों को कम मात्रा में परन्तु आवश्यक रूप से लेने की आवश्यकता होती है। ये कार्बनिक यौगिक होते हैं। विटामिन उसे कहा जाता है जो शरीर द्वारा पर्याप्त मात्रा में शरीर के अंदर तो उत्पन्न नहीं किया जा सकता परन्तु भोजन के रूप में लेना आवश्यक होता है. विटामिन डी वसा-घुलनशील प्रो-हार्मोन का एक समूह होता है। त्वचा जब धूप के संपर्क में आती है तो शरीर में विटामिन डी निर्माण की प्रक्रिया आरंभ होती है। यह मछलियों में भी पाया जाता है। विटामिन डी की मदद से कैल्शियम को शरीर में बनाए रखने में मदद मिलती है जो हड्डियों की मजबूती के लिए अत्यावश्यक होता है। इसके अभाव में हड्डी कमजोर होती हैं व टूट भी सकती हैं। | VITAMIN D KI KAMI KA ILAJ IN HINDI | विटामिन डी शरीर में एक विशेष प्रकार की कोशिकाओं (टी-कोशिकाओं) के कार्य करने की गति वृद्धि करता है, ये टी-कोशिकाओं संक्रमण से शरीर की रक्षा करती हैं। टी-कोशिकाओं का प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मुख्य भूमिका होती है. विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा के बिना प्रतिरक्षा प्रणाली की टी-कोशिकाएं बाहरी संक्रमण से लड़ने में असमर्थ हो जाती है. जब संक्रमण से सामना होता है, यह विटामिन डी की उपलब्धता के लिए एक संकेत भेजती है। इसलिये टी-कोशिकाओं की सक्रियता के लिए भी विटामिन डी आवश्यक होता है। यदि टी-कोशिकाओं को ब्लड में पर्याप्त विटामिन डी नहीं मिलता, तो वे चलना भी शुरू नहीं करतीं हैं अपना कार्य अच्छे से नही कर पाती है.
विटामिन डी की कमी के लक्षण |
 VITAMIN D DEFICIENCY SYMPTOMS IN HINDI
• हड्डियों में दर्द
• मांशपेशियों में कमजोरी
• अधिक थकान होना
• ज्यादा नींद आना
• सर से पसीना आना
• बार-बार इन्फेक्शन होना
• सांस लेने से सम्बंधित समस्या
• ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर लेवल हाई बना रहता है
• तनाव एवं उदासी
• मूड पर असर VITAMIN D KI KAMI KA ILAJ IN HINDI
• विटामिन डी की अत्यधिक कमी होने से उनके पैरों की हड्डियां और खोपड़ी कमजोर हो जाती हैं। छूने पर यह हड्डियां नर्म महसूस होती हैं।
• त्वचा का रंग बहुत गहरा होना
• मोटापा
विटामिन डी की कमी को पूरा करने के लिए क्या करें!



• डेयरी और दूध के बने उत्पादों को अपनी डाइट में जगह देकर आप विटामिन डी की कमी को पूरा कर सकते हैं.
• सूर्य की रोशनी विटामिन डी का बहुत अच्छा स्त्रोत है.
• कॉड लिवर में भी विटामिन डी भरपूर मात्रा होता है. इससे हड्ड‍ियों की कमजोरी दूर होती है.

• विटामिन डी की कमी होने पर गाजर खानी चाहिए.
• मछली के सेवन से भी विटामिन डी की कमी पूरी होती है. अगर आपको मछली पसंद नहीं है तो आप अंडे को भी भोजन में शामिल कर सकते हैं. अन्डो में विटामिन डी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है.

• विटामिन D से भरपूर कुछ अन्य आहार – 1. मछली 2. दूध 3. अंडे 4. संतरे का रस 5. अनाज 6. मशरूम 7. ऑइस्टर (कस्तूरी) 8. पनीर 9. कॉड लिवर ऑयल 10. पोर्क (सूअर का मांस)

विटामिन डी की कमी का इलाज | VITAMIN D KI KAMI KA ILAJ IN HINDI

• धुप में खड़े रहने से
. VITAMIN D KI KAMI KA ILAJ IN HINDI
• भोजन विटामिन डी युक्त आहार को शामिल करे, जैसे- वसायुक्त मछली, माँस, अंडे की जर्दी, दूध, डेरी उत्पाद, पनीर, पोर्क, सोया उत्पाद, मशरुम, सन्तरे का रस इत्यादी.
• इनसे परहेज करे. जैसे- तले वसायुक्त आहार, नमक, शक्कर, और अन्य शक्कर युक्त उत्पादों तथा संतृप्त वसा से भरे आहारों के उपयोग को कम करें। कैफीन विटामिन D के अवशोषण को रोक देते है.
• बाज़ार में आज बहुत सी दवाएं उपलब्ध हैं जिन्हें लेकर हम विटामिन डी की कमी दूर कर सकते हैं। अपने डॉक्टर की सलाह पर ही इनका सेवन करे.


शरीर में विटामिन डी की कमी को पूरा करने के टिप्स, ऐसे करे फ़ॉलो


आजकल लोग धूप में कम और अंदर रहना ज्यादा पसंद करते हैं, इससे मानव शरीर में विटामिन डी की कमी होती है और कई बीमारियों का खतरा बढ़ता है. क्या आप जानते है कि किसी भी सेहतमंद इंसान के लिए विटामिन डी का लेवल 50 नैनोग्राम/मिलीग्राम होना चाहिए.

ज्यादातर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं होती कि जिस तरह से शरीर में रोजाना विटामिन, प्रोटीन की खुराक जरूरी है, उसी तरह से विटामिन डी की भी खुराक जरूरी है. एक सेहतमंद इंसान के शरीर में विटामिन डी का लेवल 20 से 50 नैनोग्राम/मिलीग्राम के बीच होता है. चिकित्सको के अनुसार 50 को भी अच्छा लेवल माना जाता है पर अगर लेवल 25 से कम है तो चिकित्सक की सलाह लें और विटामिन डी की खुराक लें.

शरीर में विटामिन डी की कमी को अगर आप घरेलु नुस्खों के द्वारा दूर करना चाहे तो इसके लिए आपको तिल का तेल शरीर में लगाकर रोजाना 20 मिनट तक धूप में बैठें. जब तेल शरीर के अंदर जायेगा तो उसका कोलेस्ट्राल विटामिन डी में कन्वर्ट होगा जिससे शरीर में विटामिन डी का स्तर बढ़ता है. यदि शरीर में विटामिन डी का लेवल बहुत ज्यादा हो तो भी वह बहुत खतरनाक हो सकता है.

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